दावाग्नेरात्मनः क्षेमं वीक्ष्य ते मेनिरेऽमरम्॥ १४
kṛṣṇasya yogavīryaṃ tad yogamāyānubhāvitam|
dāvāgnerātmanaḥ kṣemaṃ vīkṣya te menire'maram|| 14
अर्थ
श्रीकृष्णकी इस योगसिद्धि तथा योगमायाके प्रभावको एवं दावानलसे अपनी रक्षाको देखकर उन्होंने यही समझा कि श्रीकृष्ण कोई देवता हैं॥ १४॥✎ 1932
कृष्णस्य योगवीर्यं तद् योगमायानुभावितम्।
दावाग्नेरात्मनः क्षेमं वीक्ष्य ते मेनिरेऽमरम्॥ १४
श्रीकृष्णकी इस योगसिद्धि तथा योगमायाके प्रभावको एवं दावानलसे अपनी रक्षाको देखकर उन्होंने यही समझा कि श्रीकृष्ण कोई देवता हैं॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.19.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 258) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/19/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1932 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): दावा-नलसे → दावानलसे