श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.20.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

मार्गा बभूवुः सन्दिग्धास्तृणैश्छन्‍ना ह्यसंस्कृताः।

नाभ्यस्यमानाः श्रुतयो द्विजैः कालहता३ इव॥ १६

mārgā babhūvuḥ sandigdhāstṛṇaiśchannā hyasaṃskṛtāḥ|

nābhyasyamānāḥ śrutayo dvijaiḥ kālahatā iva|| 16

अर्थ

जो मार्ग कभी साफ नहीं किये जाते थे, वे घाससे ढक गये और उनको पहचानना कठिन हो गया—जैसे जब द्विजाति वेदोंका अभ्यास नहीं करते, तब कालक्रमसे वे उन्हें भूल जाते हैं॥ १६॥✎ 1664

टिप्पणियाँ

  1. ३

    कालेन वा हताः।

    (मुद्रित पृष्ठ 260)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1664 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: आदेशा-नुसार → आदेशानुसार

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