सूर्यने राजाकी तरह पृथ्वीरूप प्रजासे आठ महीनेतक जलका कर ग्रहण किया था, अब समय आनेपर वे अपने किरण-करोंसे फिर उसे बाँटने लगे॥ ५॥✎ 19802078
अष्टौ मासान् निपीतं यद् भूम्याश्चोदमयं वसु।
स्वगोभिर्मोक्तुमारेभे पर्जन्यः काल आगते॥ ५
सूर्यने राजाकी तरह पृथ्वीरूप प्रजासे आठ महीनेतक जलका कर ग्रहण किया था, अब समय आनेपर वे अपने किरण-करोंसे फिर उसे बाँटने लगे॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.20.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 259) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/20/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1980 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): अपनी → अपने