अच्छा, मैं अपनी योगमायासे इसका भलीभाँति जवाब दूँगा। ये मूर्खतावश अपनेको लोक-पाल मानते हैं, इनके ऐश्वर्य और धनका घमण्ड तथा अज्ञान मैं चूर-चूर कर दूँगा॥ १६॥✎ 20812082
तत्र प्रतिविधिं सम्यगात्मयोगेन साधये।
लोकेशमानिनां मौढ्याद्धरिष्ये श्रीमदं तमः॥ १६
अच्छा, मैं अपनी योगमायासे इसका भलीभाँति जवाब दूँगा। ये मूर्खतावश अपनेको लोक-पाल मानते हैं, इनके ऐश्वर्य और धनका घमण्ड तथा अज्ञान मैं चूर-चूर कर दूँगा॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 295) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/25/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)