श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.25.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

अहो श्रीमदमाहात्म्यं गोपानां काननौकसाम्।

कृष्णं मर्त्यमुपाश्रित्य ये१ चक्रुर्देवहेलनम्॥ ३

aho śrīmadamāhātmyaṃ gopānāṃ kānanaukasām|

kṛṣṇaṃ martyamupāśritya ye cakrurdevahelanam|| 3

अर्थ

‘ओह, इन जंगली ग्वालोंको इतना घमण्ड! सचमुच यह धनका ही नशा है। भला देखो तो सही, एक साधारण मनुष्य कृष्णके बलपर उन्होंने मुझ देवराजका अपमान कर डाला॥ ३॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    मखभंगमचीकरन्।

    (मुद्रित पृष्ठ 294)

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