श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.34.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 34 · अथ चतुस्त्रिंशोऽध्यायः

प्रपन्‍नोऽस्मि महायोगिन् महापुरुष सत्पते।

अनुजानीहि मां देव सर्वलोकेश्‍वरेश्‍वर॥ १६

prapanno'smi mahāyogin mahāpuruṣa satpate|

anujānīhi māṃ deva sarvalokeśvareśvara|| 16

अर्थ

भक्तवत्सल! महायोगेश्‍वर पुरुषोत्तम! मैं आपकी शरणमें हूँ। इन्द्रादि समस्त लोकेश्‍वरोंके परमेश्‍वर! स्वयंप्रकाश परमात्मन्! मुझे आज्ञा दीजिये॥ १६॥

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