श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.39.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 39 · अथैकोनचत्वारिंशोऽध्यायः

किं नु नः कुशलं पृच्छे एधमाने कुलामये।

कंसे मातुलनाम्‍न्यङ्ग स्वानां नस्तत्प्रजासु च॥ ५

kiṃ nu naḥ kuśalaṃ pṛcche edhamāne kulāmaye|

kaṃse mātulanāmnyaṅga svānāṃ nastatprajāsu ca|| 5

अर्थ

हमारा नाममात्रका मामा कंस तो हमारे कुलके लिये एक भयंकर व्याधि है। जबतक उसकी बढ़ती हो रही है, तबतक हम अपने वंशवालों और उनके बाल-बच्चोंका कुशल-मंगल क्या पूछें॥ ५॥✎ 1929

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1929 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सौम्य-स्वभाव → सौम्यस्वभाव

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