श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.39.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 39 · अथैकोनचत्वारिंशोऽध्यायः

अहो अस्मदभूद् भूरि पित्रोर्वृजिनमार्ययोः।

यद्धेतोः पुत्रमरणं यद्धेतोर्बन्धनं तयोः॥ ६

aho asmadabhūd bhūri pitrorvṛjinamāryayoḥ|

yaddhetoḥ putramaraṇaṃ yaddhetorbandhanaṃ tayoḥ|| 6

अर्थ

चाचाजी! हमारे लिये यह बड़े खेदकी बात है कि मेरे ही कारण मेरे निरपराध और सदाचारी माता-पिताको अनेकों प्रकारकी यातनाएँ झेलनी पड़ीं—तरह-तरहके कष्ट उठाने पड़े। और तो क्या कहूँ, मेरे ही कारण उन्हें हथकड़ी-बेड़ीसे जकड़कर जेलमें डाल दिया गया तथा मेरे ही कारण उनके बच्चे भी मार डाले गये॥ ६॥✎ 1929

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1929 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सौम्य-स्वभाव → सौम्यस्वभाव

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