तदनन्तर एक दिन सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजी और उद्धवजीके साथ अक्रूरजीकी अभिलाषा पूर्ण करने और उनसे कुछ काम लेनेके लिये उनके घर गये॥ १२॥✎ 1680
अक्रूरभवनं कृष्णः सहरामोद्धवः प्रभुः।
किंचिच्चिकीर्षयन् प्रागादक्रूरप्रियकाम्यया॥ १२
तदनन्तर एक दिन सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजी और उद्धवजीके साथ अक्रूरजीकी अभिलाषा पूर्ण करने और उनसे कुछ काम लेनेके लिये उनके घर गये॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.48.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 436) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/48/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)