श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.49.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 49 · अथैकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

अपि स्मरन्ति नः सौम्य पितरौ भ्रातरश्‍च मे।

भगिन्यो भ्रातृपुत्राश्‍च जामयः सख्य एव च॥ ८

api smaranti naḥ saumya pitarau bhrātaraśca me|

bhaginyo bhrātṛputrāśca jāmayaḥ sakhya eva ca|| 8

अर्थ

‘प्यारे भाई! क्या कभी मेरे माँ-बाप, भाई-बहिन, भतीजे, कुलकी स्त्रियाँ और सखी-सहेलियाँ मेरी याद करती हैं?॥ ८॥✎ 2106

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2106 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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