श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.5.27

दशम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

भ्रातर्मम सुतः कच्चिन्मात्रा सह भवद्व्रजे।

तातं भवन्तं मन्वानो भवद‍्भ्यामुपलालितः॥ २७

bhrātarmama sutaḥ kaccinmātrā saha bhavadvraje|

tātaṃ bhavantaṃ manvāno bhavadbhyāmupalālitaḥ|| 27

अर्थ

भाई! मेरा लड़का अपनी मा (रोहिणी) के साथ तुम्हारे व्रजमें रहता है। उसका लालन-पालन तुम और यशोदा करते हो, इसलिये वह तो तुम्हींको अपने पिता-माता मानता होगा। वह अच्छी तरह है न?॥ २७॥

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