भाई! मेरा लड़का अपनी मा (रोहिणी) के साथ तुम्हारे व्रजमें रहता है। उसका लालन-पालन तुम और यशोदा करते हो, इसलिये वह तो तुम्हींको अपने पिता-माता मानता होगा। वह अच्छी तरह है न?॥ २७॥
भ्रातर्मम सुतः कच्चिन्मात्रा सह भवद्व्रजे।
तातं भवन्तं मन्वानो भवद्भ्यामुपलालितः॥ २७
भाई! मेरा लड़का अपनी मा (रोहिणी) के साथ तुम्हारे व्रजमें रहता है। उसका लालन-पालन तुम और यशोदा करते हो, इसलिये वह तो तुम्हींको अपने पिता-माता मानता होगा। वह अच्छी तरह है न?॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.5.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 154) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/5/27/