श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.6.44

दशम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

य एतत् पूतनामोक्षं कृष्णस्यार्भकमद्भुतम्।

शृणुयाच्छ्रद्धया मर्त्यो गोविन्दे लभते रतिम्॥ ४४

ya etat pūtanāmokṣaṃ kṛṣṇasyārbhakamadbhutam|

śṛṇuyācchraddhayā martyo govinde labhate ratim|| 44

अर्थ

यह ‘पूतना-मोक्ष’ भगवान् श्रीकृष्णकी अद्भुत बाल-लीला है। जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक इसका श्रवण करता है, उसे भगवान् श्रीकृष्णके प्रति प्रेम प्राप्त होता है॥ ४४॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे पूर्वार्धे षष्ठोऽध्यायः॥ ६॥

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