परीक्षित्! वृकासुर शकुनिका पुत्र था। उसकी बुद्धि बहुत बिगड़ी हुई थी। एक दिन कहीं जाते समय उसने देवर्षि नारदको देख लिया और उनसे पूछा कि ‘तीनों देवताओंमें झटपट प्रसन्न होनेवाला कौन है?’॥ १४॥
वृको नामासुरः पुत्रः शकुनेः पथि नारदम्।
दृष्ट्वाऽऽशुतोषं पप्रच्छ देवेषु त्रिषु दुर्मतिः॥ १४
परीक्षित्! वृकासुर शकुनिका पुत्र था। उसकी बुद्धि बहुत बिगड़ी हुई थी। एक दिन कहीं जाते समय उसने देवर्षि नारदको देख लिया और उनसे पूछा कि ‘तीनों देवताओंमें झटपट प्रसन्न होनेवाला कौन है?’॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.88.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 689) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/88/14/