श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.11.29

एकादश स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

कृपालुरकृतद्रोहस्तितिक्षुः सर्वदेहिनाम्।

सत्यसारोऽनवद्यात्मा समः सर्वोपकारकः॥ २९

kṛpālurakṛtadrohastitikṣuḥ sarvadehinām|

satyasāro'navadyātmā samaḥ sarvopakārakaḥ|| 29

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—प्यारे उद्धव! मेरा भक्त कृपाकी मूर्ति होता है। वह किसी भी प्राणीसे वैरभाव नहीं रखता और घोर-से-घोर दुःख भी प्रसन्‍नतापूर्वक सहता है। उसके जीवनका सार है सत्य, और उसके मनमें किसी प्रकारकी पापवासना कभी नहीं आती। वह समदर्शी और सबका भला करनेवाला होता है॥ २९॥

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