श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.13.38

एकादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

मयैतदुक्तं वो विप्रा गुह्यं यत् सांख्ययोगयोः।

जानीत माऽऽगतं यज्ञं युष्मद्धर्मविवक्षया॥ ३८

mayaitaduktaṃ vo viprā guhyaṃ yat sāṃkhyayogayoḥ|

jānīta mā''gataṃ yajñaṃ yuṣmaddharmavivakṣayā|| 38

अर्थ

सनकादि ऋषियो! मैंने तुमसे जो कुछ कहा है, वह सांख्य और योग दोनोंका गोपनीय रहस्य है। मैं स्वयं भगवान् हूँ, तुमलोगोंको तत्त्वज्ञानका उपदेश करनेके लिये ही यहाँ आया हूँ, ऐसा समझो॥ ३८॥✎ 1982

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