श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.13.39

एकादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

अहं योगस्य सांख्यस्य सत्यस्यर्तस्य तेजसः।

परायणं द्विजश्रेष्ठाः श्रियः कीर्तेर्दमस्य च॥ ३९

ahaṃ yogasya sāṃkhyasya satyasyartasya tejasaḥ|

parāyaṇaṃ dvijaśreṣṭhāḥ śriyaḥ kīrterdamasya ca|| 39

अर्थ

विप्रवरो! मैं योग, सांख्य, सत्य, ऋत (मधुरभाषण), तेज, श्री, कीर्ति और दम (इन्द्रियनिग्रह)—इन सबकी परम गति—परम अधिष्ठान हूँ॥ ३९॥✎ 1982

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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