kati vā siddhayo brūhi yogināṃ siddhido bhavān|| 2
अर्थ
उद्धवजीने कहा—अच्युत! कौन-सी धारणा करनेसे किस प्रकार कौन-सी सिद्धि प्राप्त होती है और उनकी संख्या कितनी है, आप ही योगियोंको सिद्धियाँ देते हैं, अतः आप इनका वर्णन कीजिये॥ २॥
कया धारणया कास्वित् कथंस्वित् सिद्धिरच्युत।
कति वा सिद्धयो ब्रूहि योगिनां सिद्धिदो भवान्॥ २
उद्धवजीने कहा—अच्युत! कौन-सी धारणा करनेसे किस प्रकार कौन-सी सिद्धि प्राप्त होती है और उनकी संख्या कितनी है, आप ही योगियोंको सिद्धियाँ देते हैं, अतः आप इनका वर्णन कीजिये॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.15.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 804) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/15/2/