भगवान् श्रीकृष्णने कहा—प्रिय उद्धव! धारणायोगके पारगामी योगियोंने अठारह प्रकारकी सिद्धियाँ बतलायी हैं। उनमें आठ सिद्धियाँ तो प्रधानरूपसे मुझमें ही रहती हैं और दूसरोंमें न्यून; तथा दस सत्त्वगुणके विकाससे भी मिल जाती हैं॥ ३॥
सिद्धयोऽष्टादश प्रोक्ता धारणायोगपारगैः।
तासामष्टौ मत्प्रधाना दशैव गुणहेतवः॥ ३
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—प्रिय उद्धव! धारणायोगके पारगामी योगियोंने अठारह प्रकारकी सिद्धियाँ बतलायी हैं। उनमें आठ सिद्धियाँ तो प्रधानरूपसे मुझमें ही रहती हैं और दूसरोंमें न्यून; तथा दस सत्त्वगुणके विकाससे भी मिल जाती हैं॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.15.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 804) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/15/3/