yathā carati yad brūte yairliṅgairbhagavatpriyaḥ|| 44
अर्थ
राजा निमिने पूछा—योगीश्वर! अब आप कृपा करके भगवद्भक्तका लक्षण वर्णन कीजिये। उसके क्या धर्म हैं? और कैसा स्वभाव होता है? वह मनुष्योंके साथ व्यवहार करते समय कैसा आचरण करता है? क्या बोलता है? और किन लक्षणोंके कारण भगवान्का प्यारा होता है?॥ ४४॥
अथ भागवतं ब्रूत यद्धर्मो यादृशो नृणाम्।
यथा चरति यद् ब्रूते यैर्लिङ्गैर्भगवत्प्रियः॥ ४४
राजा निमिने पूछा—योगीश्वर! अब आप कृपा करके भगवद्भक्तका लक्षण वर्णन कीजिये। उसके क्या धर्म हैं? और कैसा स्वभाव होता है? वह मनुष्योंके साथ व्यवहार करते समय कैसा आचरण करता है? क्या बोलता है? और किन लक्षणोंके कारण भगवान्का प्यारा होता है?॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.2.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 719) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/2/44/