इस प्रपंचका उपादान-कारण प्रकृति है, परमात्मा अधिष्ठान है और इसको प्रकट करनेवाला काल है। व्यवहार-कालकी यह त्रिविधता वस्तुतः ब्रह्मस्वरूप है और मैं वही शुद्ध ब्रह्म हूँ॥ १९॥✎ 1922
प्रकृतिर्ह्यस्योपादानमाधारः पुरुषः परः।
सतोऽभिव्यञ्जकः कालो ब्रह्म तत्त्रितयं त्वहम्॥ १९
इस प्रपंचका उपादान-कारण प्रकृति है, परमात्मा अधिष्ठान है और इसको प्रकट करनेवाला काल है। व्यवहार-कालकी यह त्रिविधता वस्तुतः ब्रह्मस्वरूप है और मैं वही शुद्ध ब्रह्म हूँ॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.24.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 865) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/24/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1922 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): ब्रह्म-स्वरूप → ब्रह्मस्वरूप