श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.26.18

एकादश स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

क्वायं मलीमसः कायो दौर्गन्ध्याद्यात्मकोऽशुचिः।

क्व गुणाः सौमनस्याद्या ह्यध्यासोऽविद्यया कृतः॥ १८

kvāyaṃ malīmasaḥ kāyo daurgandhyādyātmako'śuciḥ|

kva guṇāḥ saumanasyādyā hyadhyāso'vidyayā kṛtaḥ|| 18

अर्थ

कहाँ तो यह मैला-कुचैला, दुर्गन्धसे भरा अपवित्र शरीर और कहाँ सुकुमारता, पवित्रता, सुगन्ध आदि पुष्पोचित गुण! परन्तु मैंने अज्ञानवश असुन्दरमें सुन्दरका आरोप कर लिया॥ १८॥

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