श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.4.8

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

नूनं भगवतो ब्रह्मन् हरेरद्भुतकर्मणः।

दुर्विभाव्यमिवाभाति कविभिश्चापि चेष्टितम्॥ ८

nūnaṃ bhagavato brahman hareradbhutakarmaṇaḥ|

durvibhāvyamivābhāti kavibhiścāpi ceṣṭitam|| 8

अर्थ

भगवान् श्रीहरिकी लीलाएँ बड़ी ही अद्भुत—अचिन्त्य हैं। इसमें संदेह नहीं कि बड़े-बड़े विद्वानोंके लिये भी उनकी लीलाका रहस्य समझना अत्यन्त कठिन प्रतीत होता है॥ ८॥✎ 133

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #133 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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