na yaṃ vidanti tattvena tasmai bhagavate namaḥ|| 37
अर्थ
हमलोग केवल जिनके अवतारकी लीलाओंका गान ही करते रहते हैं, उनके तत्त्वको नहीं जानते—उन भगवान्के श्रीचरणोंमें मैं नमस्कार करता हूँ॥ ३७॥
यस्यावतारकर्माणि गायन्ति ह्यस्मदादयः।
न यं विदन्ति तत्त्वेन तस्मै भगवते नमः॥ ३७
हमलोग केवल जिनके अवतारकी लीलाओंका गान ही करते रहते हैं, उनके तत्त्वको नहीं जानते—उन भगवान्के श्रीचरणोंमें मैं नमस्कार करता हूँ॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.6.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 207) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/6/37/