श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.6.37

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

यस्यावतारकर्माणि गायन्ति ह्यस्मदादयः।

न यं विदन्ति तत्त्वेन तस्मै भगवते नमः॥ ३७

yasyāvatārakarmāṇi gāyanti hyasmadādayaḥ|

na yaṃ vidanti tattvena tasmai bhagavate namaḥ|| 37

अर्थ

हमलोग केवल जिनके अवतारकी लीलाओंका गान ही करते रहते हैं, उनके तत्त्वको नहीं जानते—उन भगवान्‌के श्रीचरणोंमें मैं नमस्कार करता हूँ॥ ३७॥

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