श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.17.13

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

इति व्यवसितो बुद्ध्या प्रगृहीतशरासनः।

सन्दधे विशिखं भूमेः क्रुद्धस्त्रिपुरहा यथा॥ १३

iti vyavasito buddhyā pragṛhītaśarāsanaḥ|

sandadhe viśikhaṃ bhūmeḥ kruddhastripurahā yathā|| 13

अर्थ

‘पृथ्वीने स्वयं ही अन्‍न एवं औषधादिको अपने भीतर छिपा लिया है’ अपनी बुद्धिसे इस बातका निश्‍चय करके उन्होंने अपना धनुष उठाया और त्रिपुरविनाशक भगवान् शंकरके समान अत्यन्त क्रोधित होकर पृथ्वीको लक्ष्य बनाकर बाण चढ़ाया॥ १३॥

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