श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.17.14

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

प्रवेपमाना धरणी निशाम्योदायुधं च तम्।

गौः सत्यपाद्रवद्भीता मृगीव मृगयुद्रुता॥ १४

pravepamānā dharaṇī niśāmyodāyudhaṃ ca tam|

gauḥ satyapādravadbhītā mṛgīva mṛgayudrutā|| 14

अर्थ

उन्हें शस्त्र उठाये देख पृथ्वी काँप उठी और जिस प्रकार व्याधके पीछा करनेपर हरिणी भागती है, उसी प्रकार वह डरकर गौका रूप धारण करके भागने लगी॥ १४॥

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