श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! महाराज मनुके ब्रह्मावर्त क्षेत्रमें, जहाँ सरस्वती नदी पूर्वमुखी होकर बहती है, राजा पृथुने सौ अश्वमेध-यज्ञोंकी दीक्षा ली॥ १॥✎ 401
अथादीक्षत राजा तु हयमेधशतेन सः।
ब्रह्मावर्ते मनोः क्षेत्रे यत्र प्राची सरस्वती॥ १
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! महाराज मनुके ब्रह्मावर्त क्षेत्रमें, जहाँ सरस्वती नदी पूर्वमुखी होकर बहती है, राजा पृथुने सौ अश्वमेध-यज्ञोंकी दीक्षा ली॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.19.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 496) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/19/1/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)