आप साक्षात् विष्णुके अंश हैं। वेनके दुराचारसे धर्म लुप्त हो रहा था, उस समयोचित धर्मकी रक्षाके लिये ही आपने उसके शरीरसे अवतार लिया है॥ ३७॥
भवान् परित्रातुमिहावतीर्णो
धर्मं जनानां समयानुरूपम्।
वेनापचारादवलुप्तमद्य
तद्देहतो विष्णुकलासि वैन्य॥ ३७
आप साक्षात् विष्णुके अंश हैं। वेनके दुराचारसे धर्म लुप्त हो रहा था, उस समयोचित धर्मकी रक्षाके लिये ही आपने उसके शरीरसे अवतार लिया है॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.19.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 500) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/19/37/