tathā ca kṛtvā vātsalyaṃ maghonāpi ca sandadhe|| 39
अर्थ
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—लोकगुरु भगवान् ब्रह्माजीके इस प्रकार समझानेपर प्रबल पराक्रमी महाराज पृथुने यज्ञका आग्रह छोड़ दिया और इन्द्रके साथ प्रीतिपूर्वक सन्धि भी कर ली॥ ३९॥
इत्थं स लोकगुरुणा समादिष्टो विशाम्पतिः।
तथा च कृत्वा वात्सल्यं मघोनापि च सन्दधे॥ ३९
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—लोकगुरु भगवान् ब्रह्माजीके इस प्रकार समझानेपर प्रबल पराक्रमी महाराज पृथुने यज्ञका आग्रह छोड़ दिया और इन्द्रके साथ प्रीतिपूर्वक सन्धि भी कर ली॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.19.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 500) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/19/39/