महाराज पृथु महापुरुष और सभीके पूजनीय थे। उन्होंने इसी प्रकारके अनेकों उदार कर्म करते हुए पृथ्वीका शासन किया और अन्तमें अपने विपुल यशका विस्तार कर भगवान्का परमपद प्राप्त किया॥ ७॥
स एवमादीन्यनवद्यचेष्टितः
कर्माणि भूयांसि महान्महत्तमः।
कुर्वन् शशासावनिमण्डलं यशः
स्फीतं निधायारुरुहे परं पदम्॥ ७
महाराज पृथु महापुरुष और सभीके पूजनीय थे। उन्होंने इसी प्रकारके अनेकों उदार कर्म करते हुए पृथ्वीका शासन किया और अन्तमें अपने विपुल यशका विस्तार कर भगवान्का परमपद प्राप्त किया॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.21.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 506) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/21/7/