सुभ्रु! तुम्हारे साथ इस ग्यारहवें महान् शूरवीरसे संचालित ये दस सेवक कौन हैं और ये सहेलियाँ तथा तुम्हारे आगे-आगे चलनेवाला यह सर्प कौन है?॥ २७॥
क एतेऽनुपथा ये त एकादश महाभटाः।
एता वा ललनाः सुभ्रु कोऽयं तेऽहिः पुरःसरः॥ २७
सुभ्रु! तुम्हारे साथ इस ग्यारहवें महान् शूरवीरसे संचालित ये दस सेवक कौन हैं और ये सहेलियाँ तथा तुम्हारे आगे-आगे चलनेवाला यह सर्प कौन है?॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.25.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 536) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/25/27/