श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.25.49

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

मुख्या नाम पुरस्ताद् द्वास्तयाऽऽपणबहूदनौ।

विषयौ याति पुरराड्रसज्ञविपणान्वितः॥ ४९

mukhyā nāma purastād dvāstayā''paṇabahūdanau|

viṣayau yāti purarāḍrasajñavipaṇānvitaḥ|| 49

अर्थ

पूर्वदिशाकी ओर मुख्या नामका जो पाँचवाँ द्वार था, उसमें होकर वह रसज्ञ और विपणके साथ क्रमशः बहूदन और आपण नामके देशोंको जाता था॥ ४९॥✎ 1338 1339

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1338 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति → निऋर्ऋति
  • #1339 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति → निर्ऋति

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