paryaṭantī na barhiṣman pratyanandata kaścana|| 19
अर्थ
बर्हिष्मन्! इन्हीं दिनों कालकी एक कन्या वरकी खोजमें त्रिलोकीमें भटकती रही, फिर भी उसे किसीने स्वीकार नहीं किया॥ १९॥
कालस्य दुहिता काचित्त्रिलोकीं वरमिच्छती।
पर्यटन्ती न बर्हिष्मन् प्रत्यनन्दत कश्चन॥ १९
बर्हिष्मन्! इन्हीं दिनों कालकी एक कन्या वरकी खोजमें त्रिलोकीमें भटकती रही, फिर भी उसे किसीने स्वीकार नहीं किया॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.27.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 544) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/27/19/