तुम सब एक ही धर्ममें तत्पर हो और तुम्हारा स्वभाव भी एक-सा ही है; इसलिये तुम्हारे ही समान धर्म और स्वभाववाली वह सुन्दरी कन्या तुम सभीकी पत्नी होगी तथा तुम सभीमें उसका समान अनुराग होगा॥ १६॥✎ 1915
अपृथग्धर्मशीलानां सर्वेषां वः सुमध्यमा।
अपृथग्धर्मशीलेयं भूयात्पत्न्यर्पिताशया॥ १६
तुम सब एक ही धर्ममें तत्पर हो और तुम्हारा स्वभाव भी एक-सा ही है; इसलिये तुम्हारे ही समान धर्म और स्वभाववाली वह सुन्दरी कन्या तुम सभीकी पत्नी होगी तथा तुम सभीमें उसका समान अनुराग होगा॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.30.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 566) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/30/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1915 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): ज्ञान-स्वरूप → ज्ञानस्वरूप