॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.10.47
महोरगाः समुत्पेतुर्दन्दशूकाः सवृश्चिकाः।
सिंहव्याघ्रवराहाश्च मर्दयन्तो महागजान्॥ ४७
mahoragāḥ samutpeturdandaśūkāḥ savṛścikāḥ|
siṃhavyāghravarāhāśca mardayanto mahāgajān|| 47
अर्थ
तत्पश्चात् बड़े-बड़े साँप, दन्दशूक, बिच्छू और अन्य विषैले जीव उछल-उछलकर काटने और डंक मारने लगे। सिंह, बाघ और सूअर देवसेनाके बड़े-बड़े हाथियोंको फाड़ने लगे॥ ४७॥