श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.11.2

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

वैरोचनाय संरब्धो भगवान्पाकशासनः।

उदयच्छद् यदा वज्रं प्रजा हाहेति चुक्रुशुः॥ २

vairocanāya saṃrabdho bhagavānpākaśāsanaḥ|

udayacchad yadā vajraṃ prajā hāheti cukruśuḥ|| 2

अर्थ

परम ऐश्‍वर्यशाली इन्द्रने बलिसे लड़ते-लड़ते जब उनपर क्रोध करके वज्र उठाया तब सारी प्रजामें हाहाकार मच गया॥ २॥✎ 730

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #730 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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