॥ श्रीहरिः ॥
वैरोचनाय संरब्धो भगवान्पाकशासनः।
उदयच्छद् यदा वज्रं प्रजा हाहेति चुक्रुशुः॥ २
vairocanāya saṃrabdho bhagavānpākaśāsanaḥ|
udayacchad yadā vajraṃ prajā hāheti cukruśuḥ|| 2
अर्थ
परम ऐश्वर्यशाली इन्द्रने बलिसे लड़ते-लड़ते जब उनपर क्रोध करके वज्र उठाया तब सारी प्रजामें हाहाकार मच गया॥ २॥✎ 730
वैरोचनाय संरब्धो भगवान्पाकशासनः।
उदयच्छद् यदा वज्रं प्रजा हाहेति चुक्रुशुः॥ २
परम ऐश्वर्यशाली इन्द्रने बलिसे लड़ते-लड़ते जब उनपर क्रोध करके वज्र उठाया तब सारी प्रजामें हाहाकार मच गया॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 957) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/11/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #730 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की