अपनी कठोर और मर्मस्पर्शी वाणीसे उन्होंने इन्द्रको बहुत कुछ बुरा-भला कहा और जैसे बादल पहाड़पर मूसलधार पानी बरसाते हैं, वैसे ही उनके ऊपर बाणोंकी झड़ी लगा दी॥ २०॥✎ 1978
वचोभिः परुषैरिन्द्रमर्दयन्तोऽस्य मर्मसु।
शरैरवाकिरन् मेघा धाराभिरिव पर्वतम्॥ २०
अपनी कठोर और मर्मस्पर्शी वाणीसे उन्होंने इन्द्रको बहुत कुछ बुरा-भला कहा और जैसे बादल पहाड़पर मूसलधार पानी बरसाते हैं, वैसे ही उनके ऊपर बाणोंकी झड़ी लगा दी॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 959) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/11/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1978 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): अपने → अपनी