वही मेरा वज्र मेरे प्रहार करनेपर भी इस तुच्छ असुरको न मार सका, अतः अब मैं इसे अंगीकार नहीं कर सकता। यह ब्रह्मतेजसे बना है तो क्या हुआ, अब तो निकम्मा हो चुका है’॥ ३६॥
सोऽयं प्रतिहतो वज्रो मया मुक्तोऽसुरेऽल्पके।
नाहं तदाददे दण्डं ब्रह्मतेजोऽप्यकारणम्॥ ३६
वही मेरा वज्र मेरे प्रहार करनेपर भी इस तुच्छ असुरको न मार सका, अतः अब मैं इसे अंगीकार नहीं कर सकता। यह ब्रह्मतेजसे बना है तो क्या हुआ, अब तो निकम्मा हो चुका है’॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 961) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/11/36/