श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.19.13

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

वैरानुबन्ध एतावानामृत्योरिह देहिनाम्।

अज्ञानप्रभवो मन्युरहंमानोपबृंहितः॥ १३

vairānubandha etāvānāmṛtyoriha dehinām|

ajñānaprabhavo manyurahaṃmānopabṛṃhitaḥ|| 13

अर्थ

बस, अब उससे वैरभाव रखनेकी आवश्यकता नहीं, क्योंकि वैर तो देहके साथ ही समाप्त हो जाता है। क्रोधका कारण अज्ञान है और अहंकारसे उसकी वृद्धि होती है॥ १३॥✎ 793

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #793 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् को → विष्णुभगवान्‌को

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