श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.19.14

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

पिता प्रह्रादपुत्रस्ते तद्विद्वान् द्विजवत्सलः।

स्वमायुर्द्विजलिङ्गेभ्यो देवेभ्योऽदात् स याचितः॥ १४

pitā prahrādaputraste tadvidvān dvijavatsalaḥ|

svamāyurdvijaliṅgebhyo devebhyo'dāt sa yācitaḥ|| 14

अर्थ

राजन्! आपके पिता प्रह्लादनन्दन विरोचन बड़े ही ब्राह्मणभक्त थे। यहाँतक कि उनके शत्रु देवताओंने ब्राह्मणोंका वेष बनाकर उनसे उनकी आयुका दान माँगा और उन्होंने ब्राह्मणोंके छलको जानते हुए भी अपनी आयु दे डाली॥ १४॥✎ 793

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #793 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् को → विष्णुभगवान्‌को

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