श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.23.24

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

ततस्त्विन्द्रः पुरस्कृत्य देवयानेन वामनम्।

लोकपालैर्दिवं निन्ये ब्रह्मणा चानुमोदितः॥ २४

tatastvindraḥ puraskṛtya devayānena vāmanam|

lokapālairdivaṃ ninye brahmaṇā cānumoditaḥ|| 24

अर्थ

इसके बाद ब्रह्माजीकी अनुमतिसे लोकपालोंके साथ देवराज इन्द्रने वामनभगवान्‌को सबसे आगे विमानपर बैठाया और अपने साथ स्वर्ग लिवा ले गये॥ २४॥✎ 824 825 826 1629

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
  • #824 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #825 शब्दोंके बीचका स्थान: वामनभगवान् को → वामनभगवान्‌को
  • #826 शब्दोंके बीचका स्थान: वामन-भगवान् को → वामन-भगवान्‌को
  • #1629 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: वामन-भगवान्‌को → वामनभगवान्‌को

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