इनकी यह नींद और इससे भी बढ़कर इनकी वृद्धावस्था कैसे दूर हो?’ शौनकजी! इस प्रकार चिन्ता करते-करते वे भगवान्का स्मरण करने लगे॥ ३०॥✎ 1966
अहो निद्रा कथं याति वृद्धत्वं च महत्तरम्।
चिन्तयन्निति गोविन्दं स्मारयामास भार्गव॥ ३०
इनकी यह नींद और इससे भी बढ़कर इनकी वृद्धावस्था कैसे दूर हो?’ शौनकजी! इस प्रकार चिन्ता करते-करते वे भगवान्का स्मरण करने लगे॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 43) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/2/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1966 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सुनाई → सुनायी