॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.2.39
हाहाकारो महानासीत्त्रैलोक्ये विस्मयावहः।
वेदवेदान्तघोषैश्च गीतापाठैर्विबोधितम्॥ ३९
hāhākāro mahānāsīttrailokye vismayāvahaḥ|
vedavedāntaghoṣaiśca gītāpāṭhairvibodhitam|| 39
अर्थ
त्रिलोकीमें महान् आश्चर्यजनक हाहाकार मच गया। लोग आपसमें कानाफूसी करने लगे—‘भाई! जब वेदध्वनि, वेदान्तघोष और बार-बार गीतापाठ सुनानेपर भी भक्ति, ज्ञान और वैराग्य—ये तीनों नहीं जगाये जा सके, तब और कोई उपाय नहीं है॥ ३९-४०॥