श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.40

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

भक्तिज्ञानविरागाणां नोदतिष्ठत्त्रिकं यदा।

उपायो नापरोऽस्तीति कर्णे कर्णेऽजपञ्जनाः॥ ४०

bhaktijñānavirāgāṇāṃ nodatiṣṭhattrikaṃ yadā|

upāyo nāparo'stīti karṇe karṇe'japañjanāḥ|| 40

अर्थ

त्रिलोकीमें महान् आश्‍चर्यजनक हाहाकार मच गया। लोग आपसमें कानाफूसी करने लगे—‘भाई! जब वेदध्वनि, वेदान्तघोष और बार-बार गीतापाठ सुनानेपर भी भक्ति, ज्ञान और वैराग्य—ये तीनों नहीं जगाये जा सके, तब और कोई उपाय नहीं है॥ ३९-४०॥

यह अर्थ श्लोक 39–40 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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