जब सप्ताहश्रवणका योग लगता है, तब सब पाप थर्रा उठते हैं कि अब यह भागवतकी कथा जल्दी ही हमारा अन्त कर देगी॥ ५४॥
कम्पन्ते सर्वपापानि सप्ताहश्रवणे स्थिते।
अस्माकं प्रलयं सद्यः कथा चेयं करिष्यति॥ ५४
जब सप्ताहश्रवणका योग लगता है, तब सब पाप थर्रा उठते हैं कि अब यह भागवतकी कथा जल्दी ही हमारा अन्त कर देगी॥ ५४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.54 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 67) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/5/54/