जब उनका रथ व्रजसे बाहर निकला, तब नन्दबाबा आदि गोपगण बहुत-सी भेंटकी सामग्री लेकर उनके पास आये और आँखोंमें आँसू भरकर उन्होंने बड़े प्रेमसे कहा—॥ ६५॥✎ 16781986
तं निर्गतं समासाद्य नानोपायनपाणयः।
नन्दादयोऽनुरागेण प्रावोचन्नश्रुलोचनाः॥ ६५
जब उनका रथ व्रजसे बाहर निकला, तब नन्दबाबा आदि गोपगण बहुत-सी भेंटकी सामग्री लेकर उनके पास आये और आँखोंमें आँसू भरकर उन्होंने बड़े प्रेमसे कहा—॥ ६५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.47.65 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 434) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/47/65/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)