श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.9.37

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

आकर्ण्यात्मजमायान्तं सम्परेत्य यथाऽऽगतम्।

राजा न श्रद्दधे भद्रमभद्रस्य कुतो मम॥ ३७

ākarṇyātmajamāyāntaṃ samparetya yathā''gatam|

rājā na śraddadhe bhadramabhadrasya kuto mama|| 37

अर्थ

इधर जब राजा उत्तानपादने सुना कि उनका पुत्र ध्रुव घर लौट रहा है, तो उन्हें इस बातपर वैसे ही विश्वास नहीं हुआ जैसे कोई किसीके यमलोकसे लौटनेकी बातपर विश्वास न करे। उन्होंने यह सोचा कि ‘मुझ अभागेका ऐसा भाग्य कहाँ ’॥ ३७॥✎ 1946

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1946 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): बिभूषित → विभूषित

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